Zila Tak | Desk
पाकुड़ (PAKUR) : पाकुड़ जिले के हिरणपुर निवासी निसार अहमद की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं। जिस साइकिल की दुकान में कभी निसार अपने पिता का हाथ बंटाते थे, वह दुकान आज भी हिरणपुर में उनके पिता मो. कुर्बान अंसारी चलाते हैं। इसी छोटी-सी दुकान से निकलकर निसार ने संघर्ष की राह पकड़ी और अपनी मेहनत के दम पर सरकारी सेवा तक पहुंचे।
लेकिन वर्षों के संघर्ष के बाद हासिल की गई नौकरी पर अब फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने की राज्य सरकार की घोषणा से निसार गहरे सदमे में हैं। उनके साथ करीब दो हजार चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो गया है।
पिता की दुकान में हाथ बंटाया, फिर किताबों को बनाया अपना सहारा
मो. कुर्बान अंसारी के चार बेटों में दूसरे निसार का बचपन आर्थिक संघर्षों के बीच बीता। हिरणपुर में पिता की साइकिल की छोटी-सी दुकान ही परिवार की आजीविका का प्रमुख सहारा रही है। आज भी उनके पिता उसी दुकान पर साइकिलों की मरम्मत कर परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
निसार ने भी बचपन और शुरुआती दिनों में पिता के काम में हाथ बंटाया। लेकिन मन में सरकारी नौकरी हासिल करने का सपना था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। नौकरी मिली तो भी किताबों से रिश्ता नहीं टूटा। दिन में नौकरी और रात में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी—यही उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया।
जुलाई 2019 में निसार का चयन आइआरबी में हुआ और गोड्डा के पोड़ैयाहाट में पदस्थापन मिला। करीब तीन माह बाद रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा पास कर ओडिशा में ट्रैकमैन बने। इसके दो माह बाद रेलवे ग्रुप सी की परीक्षा पास कर टाटानगर में एसी टेक्नीशियन के पद पर योगदान दिया।
करीब ढाई वर्ष बाद जुलाई 2023 में पंचायत सचिव के पद पर चयन हुआ और उन्होंने पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा प्रखंड में योगदान दिया। लेकिन निसार का लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ था। उन्होंने नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी और सितंबर 2024 में जेएसएससी सीजीएल में सफलता हासिल कर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के लिए चयनित हुए।
न्यायालय में मामला लंबित रहने के कारण नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। आखिरकार दिसंबर 2025 में कोर्ट के निर्देश के बाद उन्होंने पतना प्रखंड में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के रूप में पदभार ग्रहण किया।
जिस बेटे ने कभी पिता की दुकान में साइकिलों के बीच अपना बचपन बिताया था, वह मेहनत के दम पर सरकारी अधिकारी बन गया। पिता की दुकान आज भी वहीं है, लेकिन बेटे की जिंदगी ने संघर्ष से सफलता तक का लंबा सफर तय कर लिया है।
अब फिर वही चिंता हमारी क्या गलती है?
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द होने की खबर ने निसार को भीतर तक झकझोर दिया है। उनका कहना है कि अगर परीक्षा में धांधली हुई है तो दोषियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन पूरी परीक्षा रद्द कर देना उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत कर सफलता हासिल की है।
भावुक निसार कहते हैं, हमने कोई धांधली नहीं की है। रात-रात भर जागकर पढ़ाई की है। वर्षों की मेहनत के बाद यह मुकाम हासिल किया है। साइकिल मिस्त्री के बेटे का प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बनना कोई गुनाह नहीं है।
वह कहते हैं कि दोषियों को सजा जरूर मिले, लेकिन उनकी गलती की कीमत ईमानदार अभ्यर्थी क्यों चुकाएं? एक-दो सौ लोगों की गलती की सजा हजारों युवाओं और उनके परिवारों को नहीं मिलनी चाहिए।
निसार सरकार से पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने, दोषी अभ्यर्थियों को बाहर करने और ईमानदार सफल अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
हिरणपुर में आज भी उनके पिता साइकिल की दुकान पर मेहनत कर रहे हैं और उसी दुकान से निकला उनका बेटा सरकारी सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। लेकिन अब सवाल यह है कि वर्षों की मेहनत से हासिल यह मुकाम सुरक्षित रहेगा या एक बार फिर निसार जैसे हजारों युवाओं को अपनी मेहनत का हिसाब देना पड़ेगा।
