Zila Tak | Desk
पाकुड़ (PAKUR) : पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा में इस बार की दुर्गापूजा सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि दो सौ वर्षों से चली आ रही आस्था, परंपरा और भव्यता का अद्भुत संगम बनने जा रही है। बांसलोई नदी के पावन तट पर स्थित मां दुर्गा मंदिर को अब करोड़ों रुपये की लागत से नया और भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। मंदिर का निर्माण गुजरात के प्रसिद्ध अंबा मंदिर की तर्ज पर कराया जा रहा है, जो आने वाले समय में अमड़ापाड़ा की धार्मिक पहचान को नई ऊंचाई देने वाला है।
दो शताब्दियों से जल रही आस्था की ज्योत
अमड़ापाड़ा में मां दुर्गा की पूजा की परंपरा करीब 200 वर्षों पुरानी बताई जाती है। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस पूजा में हर वर्ष जिलेभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बांसलोई नदी के तट पर मां का दरबार सजता है तो पूरा अमड़ापाड़ा भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। यहां की दुर्गापूजा अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि पूरे पाकुड़ जिले में अपनी अलग पहचान बना चुकी है।
करोड़ों की लागत से बन रहा भव्य मंदिर
पुरानी आस्था को आधुनिक और भव्य स्वरूप देने के लिए मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। गुजरात के अंबा मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित यह मंदिर पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने की उम्मीद है। मंदिर निर्माण में करोड़ों रुपये की लागत आने की बात कही जा रही है।
30 लाख से अधिक का पूजा बजट, तीन लाख की मां की प्रतिमा
इस वर्ष दुर्गापूजा को लेकर भी तैयारियां बेहद भव्य स्तर पर की जा रही हैं। पूजा का कुल बजट 30 लाख रुपये से अधिक रखा गया है। वहीं लगभग तीन लाख रुपये की लागत से मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा तैयार कराई जा रही है। प्रतिमा को आकर्षक और जीवंत स्वरूप देने के लिए कोलकाता से विशेष रूप से आए कलाकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
पंडाल निर्माण, विद्युत सज्जा, आकर्षक रोशनी और अन्य तैयारियों को भी भव्य रूप देने में पूजा समिति और स्थानीय लोग जुटे हुए हैं।
इस बार कुछ ऐसा होगा मां का दरबार, जिसे देखने उमड़ेगा जनसैलाब
अमड़ापाड़ा में इस बार मां दुर्गा का दरबार केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि आस्था, कला और भव्यता का बड़ा संगम बनने जा रहा है। एक ओर दो सौ वर्ष पुरानी परंपरा, दूसरी ओर करोड़ों की लागत से आकार ले रहा भव्य मंदिर और तीसरी ओर 30 लाख से अधिक के बजट में होने वाला दुर्गापूजा आयोजन इन सबने श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ा दी है।
बांसलोई के तट पर जब मां दुर्गा का भव्य दरबार सजेगा, तो अमड़ापाड़ा एक बार फिर आस्था के रंग में रंगा नजर आएगा।
