Zila Tak | Desk
पाकुड़ (PAKUR) : एक ओर कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर हिरणपुर प्रखंड में रासायनिक खाद की कालाबाजारी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आरोप है कि लाइसेंसधारी खाद विक्रेता किसानों से सरकारी निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक कीमत वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं, विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई ई-पॉस मशीन का भी अधिकांश दुकानों में उपयोग नहीं किया जा रहा, जिससे बिक्री का कोई डिजिटल रिकॉर्ड या रसीद किसानों को नहीं मिल रही।
प्रखंड में करीब 32 लाइसेंसधारी खाद दुकानें संचालित हैं। इफको द्वारा किसानों के लिए यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराया गया है। कृषि विभाग के अनुसार 50 किलो यूरिया का सरकारी मूल्य ₹266 तथा 50 किलो डीएपी का मूल्य ₹1,650 निर्धारित है। इसके बावजूद किसानों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है।
हाथीगढ़ के किसान सोम सोरेन, चौकीधाप के बबलू हेम्ब्रम और चाँदलाल टुडू सहित कई किसानों ने बताया कि उनसे 50 किलो यूरिया के लिए ₹380 तथा डीएपी के लिए ₹1,800 वसूले गए। किसानों का कहना है कि खाद खरीदने के दौरान न तो ई-पॉस मशीन से बिक्री दर्ज की गई और न ही कोई रसीद दी गई।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अधिकांश लाइसेंसधारी दुकानों को ई-पॉस मशीन उपलब्ध कराई जा चुकी है, लेकिन मशीन खराब होने का बहाना बनाकर उसका उपयोग नहीं किया जा रहा। इससे किसानों को पारदर्शी व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कुछ दुकानदारों ने बताया कि देवघर स्थित इफको एजेंसी से ही उन्हें निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके कारण वे भी अधिक दाम पर बेचने को विवश हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां किसानों से खुलेआम मनमाना मूल्य वसूला जा रहा है। कई दुकानों पर मूल्य सूची तक प्रदर्शित नहीं है, जबकि डीएपी की बोरियों पर अंकित मूल्य को लेकर भी किसानों में संशय बना हुआ है।
गौरतलब है कि अब तक कृषि विभाग द्वारा दुकानों का प्रभावी निरीक्षण नहीं किए जाने से दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो खेती की लागत और बढ़ जाएगी।
इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने कहा कि मामले की शीघ्र जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
