Zila Tak | Desk
पाकुड़ (PAKUR) : पाकुड़ जिले के हिरणपुर बाजार स्थित जबरदाहा मौजा की कैसर-ए-हिंद जमीन पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सरकारी जमीन पर प्रशासनिक अभिलेखों में करीब 300 दुकानों को पिंच (Pinch) रेंट पर आवंटित किया गया है, जबकि मौके पर 400 से अधिक दुकानें संचालित होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इनमें 100 से अधिक दुकानों का निर्माण बिना वैध स्वीकृति के किया गया है।
इतना ही नहीं, सूत्रों के अनुसार पिछले 10 वर्षों से अधिकांश दुकानों का नवीनीकरण (रिन्यूअल) नहीं कराया गया है, जबकि नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ष पट्टे का नवीनीकरण होना आवश्यक है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले का एक और अहम पहलू यह है कि दुकानों से आज भी अंग्रेजों के जमाने में तय बंदोबस्ती लगान की दर पर ही किराया वसूला जा रहा है। जानकारी के अनुसार नियमों के तहत लगान में प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान है, लेकिन वर्षों से इसमें कोई संशोधन नहीं किया गया। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि कई दुकानों का कथित रूप से खरीद-बिक्री भी कर दी गई, जबकि ‘कैसर-ए-हिंद’ जमीन पर बंदोबस्ती प्राप्त दुकानों का क्रय-विक्रय नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
गौरतलब है कि ‘कैसर-ए-हिंद’ अंग्रेजों के समय की सरकारी जमीन होती है, जिस पर केंद्र या राज्य सरकार का स्वामित्व होता है। ऐसी जमीन निजी संपत्ति नहीं होती और इसका उपयोग व हस्तांतरण निर्धारित सरकारी नियमों के तहत ही किया जा सकता है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि मौके पर दुकानों की संख्या रिकॉर्ड से कहीं अधिक है, वर्षों से नवीनीकरण नहीं हुआ है और नियमों के विपरीत खरीद-बिक्री भी हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर सरकारी राजस्व की क्षति और अनियमितताओं की जांच की मांग की है।
