दुमका | 4 नवंबर 2026
Zila Tak Desk (संथाल परगना) : झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में बालू की उपलब्धता और कीमतों का मुद्दा आम लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। दुमका, साहिबगंज, गोड्डा और पाकुड़ सहित विभिन्न जिलों में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को बालू की आपूर्ति, परिवहन और कीमतों में अंतर जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सीमित बालू घाटों से आपूर्ति पर असर
झारखंड में मानसून के दौरान बालू खनन पर रोक के बाद 15 अक्टूबर से वैध बालू उठाव दोबारा शुरू हुआ है। हालांकि, राज्य के 444 चिन्हित बालू घाटों में से 302 की नीलामी होने के बावजूद फिलहाल केवल 14 घाटों से ही वैध बालू उठाव की अनुमति है।
इस सीमित आपूर्ति के कारण बाजार में बालू की उपलब्धता सामान्य होने में समय लग सकता है। खनन विभाग के अनुसार, अन्य घाटों को चालू करने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी, वन विभाग की अनापत्ति और ग्रामसभा की अनुमति जैसी प्रक्रियाएं पूरी करना आवश्यक है।
बालू की कीमतों में अंतर से आम लोगों की परेशानी
दुमका और आसपास के क्षेत्रों में बालू की कीमतें आपूर्ति, परिवहन दूरी और स्थानीय बाजार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है जो अपने घर का निर्माण या मरम्मत करा रहे हैं। इसके अलावा, ठेकेदारों और छोटे निर्माण कारोबारियों की लागत भी बढ़ सकती है।
सरकार के सामने चुनौती
राज्य सरकार ने बालू खनन से 3,500 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अधिक से अधिक बालू घाटों को वैध रूप से चालू करना महत्वपूर्ण होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, बालू की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने, अवैध खनन पर रोक लगाने और पारदर्शी मूल्य व्यवस्था बनाने से आम लोगों को राहत मिल सकती है।
