Zila Tak | Desk
पाकुड़ (PAKUR) : पाकुड़ जिले के उपायुक्त के रूप में अपने कार्यकाल को यादगार बनाते हुए मनीष कुमार अब नए दायित्व के लिए चाईबासा रवाना हो गए हैं, लेकिन उनके द्वारा छोड़ी गई विकास की छाप लंबे समय तक जिले की पहचान बनी रहेगी।
उनके नेतृत्व में शुरू किए गए प्रोजेक्ट ‘परख’ और ‘परख 2.0’ ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा बदलाव लाया, जिसकी कल्पना कभी मुश्किल थी। जो जिला कभी पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, वही आज शिक्षा के क्षेत्र में राज्य के अग्रणी जिलों में गिना जाने लगा है। पिछले वर्ष माध्यमिक परीक्षा में 96.8% परिणाम के साथ राज्य में दूसरा स्थान हासिल करना इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। वहीं 9वीं और 11वीं के हालिया परीक्षा परिणामों में भी इसी सकारात्मक परिवर्तन की झलक साफ दिखाई दी।
सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया प्रोजेक्ट ‘प्राण’ भी मील का पत्थर साबित हुआ। पंचायत सचिवालय भवनों की रैंकिंग जैसी अभिनव पहल ने पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित किया। पंचायत उन्नति सूचकांक में जिले की तीन पंचायतों का शीर्ष 25 में स्थान बनाना और पाकुड़िया प्रखंड का राज्य में दूसरा स्थान हासिल करना, इस प्रयास की सफलता को दर्शाता है।
सामाजिक सुधार की दिशा में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। प्रोजेक्ट ‘अलख’ के जरिए बाल विवाह पर रोक लगाने की मुहिम को मजबूती मिली, तो प्रोजेक्ट ‘जागृति’ ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी। वहीं प्रोजेक्ट ‘परिवर्तन’ के तहत जेल में बंद कैदियों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण देकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई गई। प्रोजेक्ट ‘बचपन’ के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के समग्र विकास की नींव रखी गई।
युवाओं के सपनों को पंख देने के लिए प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई, जिससे अब जिले के छात्र जेपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही शहरी जलापूर्ति योजना को लेकर उनके गंभीर प्रयास अब जमीन पर दिखने लगे हैं।
मनीष कुमार का यह कार्यकाल सिर्फ योजनाओं का नहीं, बल्कि बदलाव, उम्मीद और विकास की नई कहानी का प्रतीक बन गया है। उनके प्रयासों ने पाकुड़ को एक नई पहचान दी है—एक ऐसा जिला, जो अब पीछे नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की मिसाल बन चुका है।
रिपोर्ट : नंद किशोर मंडल
